बीसवीं और 21वीं शताब्दी राजनीतिक केंद्रीकरण और संचार केंद्रीकरण की शताब्दी है | व्यापारिक एकाधिकार केंद्रीकरण और मुनाफा इस दौर के 3 बड़े लक्ष्य है | पहली बार एनएसए, माइक्रो सॉफ्ट, गूगल, फेसबुक, एप्पल आदि के बीच समझौता हुआ है इसे प्रिज्म कार्यक्रम के नाम से जानते हैं | इसका मकसद है विश्व में निगरानी करना, बहुराष्ट्रीय निगमों और अमेरिका के राजनीतिक और सांस्कृतिक हिताे का विस्तार करना | इंटरनेट का समस्त डाटा संकलित करना, उसका व्यापारिक और राजनीतिक इस्तेमाल करना | कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के आने के बाद संचार क्रांति के पैराडाइम का जन्म होता है | अब हम ज्ञान मीमांसा से तत्व मीमांसा की ओर मुड़ गए हैं | यानी आप क्या जानते हो से तुम क्या हो की ओर मुड़ गए हैं | ज्ञान प्रबंधन से अस्मिता प्रबंधन की ओर मुड़ गए हैं | सोशल मीडिया ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है | नव्य उदारीकरण के दौर में 1990-91 मैं जब संचार क्रांति आई तो वह कंप्यूटर, मोबाइल-टेलीफोन तक सीमित थी | उस दौर में तकनीकी उपयोग और सूचना या ज्ञान के संचय पर जोर दिया गया | सूचना से ज्ञान की और प्रयास किया | लेकिन 2004 में फेसबुक के आने के बाद ज्ञान से छलांग लगाकर समाज सीधे अस्मिता के क्षेत्र में दाखिल हो गया |
जगदीश्वर चतुर्वेदी मथुरा में 1997 में जन्म | आरंभ में 13 वर्षों तक सिद्धांत ज्योतिषशास्त्र का अध्ययन | ज्योतिषशास्त्र पर आरंभ में दो पुस्तकें प्रकाशित | संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से सिद्धांत ज्योतिषाचार्य (1979), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से हिंदी में एम.ए. (1981), एमफिल, (1982), (आपातकालीन हिंदी कविता और नागार्जुन), पी. एच. डी. स्वातंत्रोत्तर हिंदी कविता की मार्क्सवादी समीक्षा का मूल्यांकन (1986), कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में 1989 से 2016 तक अध्यापन कार्य, तीन बार विभाग अध्यक्ष | साहित्यालोचन और मीडिया पर 58 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित | कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सन 1989 में प्रवक्ता सन 1993 में रीडर और 2001 में प्रोफेसर पद पर नियुक्ति | सन सन 2016 में रिटायर | प्रकाशित कुछ प्रमुख पुस्तकें - उंबेतरो इको: चिन्हशास्त्र, साहित्य और मीडिया, (2012), मीडिया समग्र 11 खंडों में (2013), साहित्य का इतिहास दर्शन (2013), डिजिटल कैपिट लिजम, फेसबुक संस्कृति और मानवाधिकार (2014), इंटरनेट, साहित्य लोचन और जनतंत्र के (2014), नामवर सिंहऔर समीक्षा के सीमांत (2016), रामविलास शर्मा और परवर्ती पूंजीवाद और साहित्य इतिहास की समस्याएं , (2017) उत्तर आधुनिकतावाद (2004), तिब्बत दमन और मीडिया (2009), नदी ग्राम मीडिया और भूमंडलीकरण 2008 स्त्रीवादी साहित्य विमर्श (2000), मार्क्सवादी साहित्यालोचना की समस्यां, साइबर परिप्रेक्ष्य में हिंदी संस्कृत, उत्तर आधुनिकतावाद और विचारधारा, आधुनिकतावाद और विचारधारा, लेखक विश्व दृष्टि और संस्कृति |
भूमिका
सोशल मीडिया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
ब्लॉग लेखन का सुख और संभावनाएं
सोशल मीडिया के डिजिटल संस्कार
माओवाद आधुनिकतावाद हिंसाचार
मानवाधिकार के ग्लोबल पैराडाइम के अंतर्विरोध
अस्मिता वर्चस्व और अमेरिकी जेल व्यवस्था
विकीलिक और अमेरिकी साम्राज्यवाद
डिजिटल कैपिटलिजम की विशेषताएं
फेसबुक और मीडिया का सांस्कृतिक परिवेश
फेसबुक और अभिव्यक्ति का लक्ष्मणरेखा
अवचेतन का ड्रामा है फेसबुक
फेसबुक माने सामाजिक निजता का अंत
सोशल मीडिया क्रांति और संस्कृति
नाइन इलेवन, अमेरिकी इमेज और वर्चुअल संस्कृति
वर्चुअल रियलिटी जराेन लेनियर के परिप्रेक्ष्य में
वर्चुअल इतिहास के बोने प्रयोग
असुंदर समाज में सुंदरता की खोज है वर्चुअल रियलिटी
कंप्यूटर और वीडियो गेम के सैद्धांतिकी