Description
नारी का जीवन बहुत ही संघर्ष से विरत है महिला साहित्यकार के लिए सबसे पहले बाहरी संदर्भों में उसका अधिक समय होता है जहां वह जीती है और सांस लेती है और वहीं दूसरी और होती है समय की चुनौतियां जिससे वो बिल्कुल परे होती है उनके जीवन वे सृजन के बीच अनवरत की स्थिति बनी रहती है, उनकी राह आसान नहीं है उनकी राह में बहुत सी विचारधाराएं वे दुविधाएं हैं |
About Author
डॉ . रजनी पाठक
जन्मतिथि : 19 अगस्त 1979 शिक्षा : एम .ए. हिंदी, पीएच.डी. (हिंदी) हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ अंग्रेजी से हिंदी-पंजाब में अनुवाद में स्नातकोतस डिप्लोमा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी व वेब डिजाइन में NICT चंडीगढ़ से स्नातकोत्तर डिप्लोमा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध पेपर प्रकाशित दलित साहित्य नामक पुस्तक शीध्र प्रकाश्य कई साहित्यकार आयोजनों, सेमिनारों, वर्कशॉप में शोध-पत्र की प्रस्तुति व भागीदारी ; फेसबुक ,वेब मैगजीन पर हिंदी साहित्य के प्रचार- प्रसार में सक्रिय सम्प्रति : हिंदी प्रवक्ता के रूप में कार्यरत
Table of Content
- हिंदी साहित्य का परिचय
- हिंदी साहित्य का इतिहास
- हिंदी साहित्य में नारी योगदान
- मध्यकालीन में नारी की स्थिति और हिंदी साहित्य
- इक्कीसवीं सदी और हिंदी साहित्य में नारी लेखन
- स्त्री विमर्श और हिंदी साहित्य
- हिंदी उपन्यास में स्त्री विमर्श
- आधुनिक हिंदी कविता और स्त्री- विमर्श
- नारी समाज और साहित्य
- प्रेमचंद के उपन्यासों में स्त्री सशक्तिकरण
- हिंदी पद्य साहित्य में नारी विमर्श
- राष्ट्र निर्माण और विकास में महिलाओं की भूमिका
- महादेवी वर्मा की दृष्टि में भारतीय नारी
- सशक्तिकरण की सार्थकता
- हिंदी साहित्य में नारी के बदलते रूप
- स्वातंत्योतर उपन्यास साहित्य में चित्रित नारी जीवन
- अज्ञेय द्वारा स्त्री विमर्श
- वैश्वीकरण और महिला लेखन में बदलता स्वरूप
- हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श एवं समकालीन चुनौतियां
- वर्तमान साहित्य में स्त्री उत्थान क्यों और कैसे
- शिवानी की कहानीयां : नारी का आत्मबोध
- रामवृक्ष बेनीपुर के निबंधों में नारी विमर्श
- मन्नू भंडारी की कहानियों में नारी
- समकालीन हिंदी कहानियां : स्त्री जीवन
- समकालीन हिंदी उपन्यासों में आदिवासी नारी की सामाजिक स्थिति
- संदर्भ ग्रंथ