कुमाऊँ में शिव-भक्ति परंपरा (108 शिवलिंग के विशेष संदर्भ में) (Kumaon me Shiv-Bhakti Parampara (108 Shivling ke Vishesh Sandarbh me))

जितेंद्र कुमार लोहानी, राजनेश पांडेय

Rs.1195.00

9788199851566
Hardcover
Academic Publication
2026

Description

कुमांऊ में शिव-भक्त परपठ 108 शिवलिंग के विलय की का एक और शोधपरक शिव की उप धार्मिक अनुष्ठान न मानकर सामाजिक, सास्कृतिक और भौगोलिक जीवन से बहराई से परंपरा के व्याख्यादित किया गया है। पुस्तक में नौ अध्यायों के माध्यम से शिवतत्व को दार्शनिक अवधारणा, 108 संख्या के आध्यात्मिक महत्त्व, भारत में शेव परंपरा के ऐतिहासिक विकास, कुमाऊँ क्षेत्र में उसके प्रसार, मंदिर स्थापत्य, प्रमुख शिवालयों के विवरण तथा विशेष रूप से जागेश्वर धाम के महत्व का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। साथ ही, यह पंच उत्तराखंड के मंदिरों को स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार सृजन से जोड़ते हुए उनके समकालीन महत्व को भी रेखांकित करता है, जिससे यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्वानों और सांस्कृतिक रूचि रखने वाले पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ के रूप स्थापित होती है। जितेन्द्र कुमार सोहनी, एम.ए., पी-एच.डी., डी.लिट् एवं यूसेट (अर्थशास्त्र)। मे वर्तमान में पिछले 15 से अधिक वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डी. एस. बी. परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में अर्थशास्त्र विभाग में अध्यापन कार्य (स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर) कर रहे हैं। डॉ. लोहनी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत क्षेत्रीय आर्थिक विषयों पर व्यापक शोधरत हैं। विभिन्न शोध परियोजनाओं में कोर टीम एसोसिएट तथा सह-अन्वेषक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए आपने स्नातकोत्तर स्तर पर अनेक विद्यार्थियों का शोध निर्देशन किया है। आपके उत्तराखंड के आर्थिक परिप्रेक्ष्य से संबंधित कई शोध पत्र प्रकाशित हैं तथा कुल 10 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 50 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हैं। आपको वर्ष 2022 में प्रो. वाई.पी.एस. पांगती पुरस्कार सहित समय-समय पर अन्य सम्मानों से नवाजा गया है। शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए आप वर्तमान में 'उन्नत भारत अभियान' सहित विभिन्न विश्वविद्यालय समितियाँ में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

About Author

प्रोफेसर रजनीश पाण्डे, एम.ए., पी-एच.डी. (अर्थशास्त्र), कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल वर्तमान में संकायाध्यक्ष (कला संकाय) तथा संयोजक एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल के रूप में कार्यरत हैं तथा उन्हें स्नातक एवं स्वातकोत्तर स्तर पर 35 से अधिक वर्षों से अधिक का अध्यापन अनुभव है। उनकी शोध रुचि के प्रमुख क्षेत्र क्षेत्रीय अर्थशास्त्र और श्रम अर्थशास्त्र हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पत्रिकाओं में कई शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने छ पुस्तकों का संपादन किया है तथा संपादित पुस्तकों में कई अध्याय भी लिखे हैं। प्रोफेसर पाण्डे ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों और सेमिनारों में भाग लिया तथा कई का अध्यक्षता भी की है। उनके मार्गदर्शन में अनेक शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त हुई है। वे वर्ष 2014 से 2017 तक कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) के पद पर कार्यरत रहे। इसके अतिरि उन्हें वर्ष 2019 से 2022 तक सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एस.जे.बी.एन.एल.). हिमाचल प्रदेश के निदेशक मंडल में गैर-आधिकारिक स्वतंत्र निदेशक (Non-official Independent Director) के रूप में भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया गया। वर्ष 2012-2013 तक उन्हें रोजगारपरक अध्ययन एवं विकासोन्मुख शोध संस्थान (आई.पी.एस.डी.आर.), कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल का निदेशक भी नियुक्त किया. गया तथा वर्ष 2022 से पुनः इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

Table of Content

प्रस्तावना आभार
अध्याय 1 अध्यात्म में शिव
अध्याय 2 सनातन धर्म में 108 अंक का महत्व
अध्याय 3 भारत में शैव परंपरा: उद्भव एवं विकास
अध्याय 4 कुमाऊँ में शैव परम्परा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अध्याय 5 कुमाऊँ के प्राचीन देवालयों का वास्तुशिल्प
अध्याय 6 कुमाऊँ के प्रमुख प्राचीन शिव मंदिर
अध्याय 7 अल्मोड़ा जनपदः एतिहासिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य एवं शिव मंदिर
अध्याय 8 जागेश्वर धाम
अध्याय 9 कुमाऊँ में तीर्थाटन की आर्थिक
संभावनाएँ संदर्भ ग्रंथ लेखकगण

अध्याय 1 अध्यात्म में शिव
अध्याय 2 सनातन धर्म में 108 अंक का महत्व
अध्याय 3 भारत में शैव परंपरा: उद्भव एवं विकास
अध्याय 4 कुमाऊँ में शैव परम्परा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अध्याय 5 कुमाऊँ के प्राचीन देवालयों का वास्तुशिल्प
अध्याय 6 कुमाऊँ के प्रमुख प्राचीन शिव मंदिर
अध्याय 7 अल्मोड़ा जनपदः एतिहासिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य एवं शिव मंदिर