पिछले लंबे समय से लिखने का आभार छूट चुका था | समय ही नहीं निकल पाता था या यूं कहे कि मन में लिखने की इच्छा ही मर गई थी | साहित्य पढ़ना भी लगभग छोड़ दिया था इसके बावजूद भी भीतर कहीं कुछ घटित होता रहता था अदृश्य पात्र जन्म लेते थे और कुछ समय बाद मर जाते थे इसी बीच हरियाणा के प्रसिद्ध पत्रकार लेखक व कवि कमलेश भारतीय के साथ संपर्क हुआ | उनके द्वारा व्हाट्सएप पर हिंदी के लेखकों का एक ग्रुप पाठक मंच पिछले लंबे समय से सफलतापूर्वक चल रहा है | उन्होंने मुझे इस ग्रुप के साथ जोड़ दिया अन्य लेखकों की रचना पढ़कर मेरे अंदर का लेखक दोबारा जीवित हो गया लॉक डाउन के दौरान मैंने कुछ लघु कथाएं लिखकर पाठक मंच में पोस्ट करना शुरू कर दिया था | पाठकों द्वारा अच्छी प्रतिक्रिया आने पर मैंने कुछ लघु कथाएं फेसबुक पर भी पोस्ट कर दी फेसबुक पर भी पाठकों ने अच्छी प्रतिक्रिया दिखाई इसी बीच कवि नाटककार और आलोचक के रूप में सुविख्यात डॉ. नरेंद्र मोहन का एक दिन फोन कॉल आया और और पूछने लगे कि आजकल क्या लिख रहे हो जब मैंने उन्हें लघु कथाओं के बारे में अवगत कराया तो उन्होंने एक लघु कथाओं को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करके करने के लिए प्रेरित किया | इस तरह यह पुस्तक आप सभी के हाथों में है |
मनोज धीमान का जन्म 16 जून 1964 को फिरोजपुर छावनी पंजाब में हुआ था | उनके पिता स्वर्गीय एच आर धीमान एक जाने-माने पत्रकार थे| घर में विभिन्न भाषाओं के अनगिनत समाचार पत्र व मैगजीन आया करते थे | बचपन में पत्र-पत्रिकाओं को उलट पलट कर चित्र देखने का शौक कब साहित्य पढ़ने में तब्दील हो गया मालूम ही न हुआ| फिर लिखने का शौक भी जाग उठा| बचपन में बच्चों के लिए खूब साहित्य लिखा जिनमें कहानियां कविताएं क्षणिकाएं इत्यादि शामिल थीं| सैकड़ों की संख्या में व्यंगचित्र इत्यादि भी बनाए | इनका प्रकाशन विभिन्न पत्र पत्रिकाओं (पंजाब केसरी, हिंदी समाचार, जगबाणी वीर प्रताप द ट्रिब्यून, दैनिक ट्रिब्यून, जागृति, लोटपोट इत्यादि) में हुआ | कई जगह मनोज धीमान के इंटरव्यू प्रकाशित हुए एक बार आकाशवाणी के एक प्रोग्राम युवकों के लिए विशेष में भी इंटरव्यू प्रसारित हुआ | वर्ष 1987 में पत्रकारिता में कदम रखा | फिरोजपुर से द ट्रिब्यून ग्रुप, टाइम्स ऑफ इंडिया (दिल्ली एडिशन), प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, अजित पंजाबी में स्ट्रिगर के तौर पर कार्य किया | वर्ष 2000 में स्टाफ रिपोर्टर के तौर पर इंडियन एक्सप्रेस में नियुक्त हो गई | उसके बाद हिंदुस्तान टाइम्स (प्रमुख संवाददाता) व डेली पोस्ट (डिप्टी न्यूज एडिटर) में भी काम किया| पत्रकारिता के दौरान स्टाफर के तौर पर उन्हें लुधियाना, जालंधर व धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में कार्य किया पिछले लगभग 8 वर्ष से वे ऑनलाइन न्यूज पोर्टल चला रहे हैं | अब तक मनोज धीमान की हिंदी में 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं |पहली पुस्तक लेट नाइट पार्टी कहानी संग्रह 2007 में प्रकाशित हुआ था जिसका विमोचन लुधियाना पंजाब में सीबीआई के भूतपूर्व निर्देशक सरदार जोगिंदर सिंह द्वारा किया गया था | बाद में इस कहानी संग्रह का अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ जिसे प्रोफेसर शाहिला खान ने अंग्रेजी में अनुवाद किया था | वर्ष 2009 में कविता संग्रह बारिश की बूंदे प्रकाशित हुआ | वर्ष 2012 में उपन्यास शून्य की और प्रकाशित हुआ इस बीच उनकी कई काव्य रचनाएँ व कहानियां विभिन्न समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रमुखता के साथ प्रकाशित हुई |आकाशवाणी जालंधर पर कुछ भी एक कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं |