राजनीतिक दर्शन के अंतर्गत राजनीति, स्वतंत्रता, न्याय, संपत्ति, अधिकार, कानून तथा सत्ता द्वारा कानून को लागू करने आदि विषयों से संबंधित प्रश्नों पर चिंतन किया जाता है रु यह क्या हैं , उनकी आवश्यकता क्यों हैं, कौन सी वस्तु सरकार को शवैधश बनाती है, किन अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है , विधि क्या है, किसी बैध सरकार के प्रति नागरिकों के क्या कर्तव्य है, कब किसी सरकार को उकाड़ फेंकने वैध है आदि | प्राचीन काल में सारा व्यवस्थित चिंतन दर्शन के अंतर्गत होता था अतः सारी विद्याएं दर्शन के विचार क्षेत्र में आती थी | राजनीति सिद्धांत के अंतर्गत राजनीति के भिन्न भिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता हैं | राजनीति का संबंध का मनुष्यों के सार्वजनिक जीवन से हैं | परंपरागत अध्ययन में चिंतन मुलक पद्धति की प्रधानता थी जिससे सभी तत्वों का निरीक्षण तो नहीं किया जा सकता परंतु तर्कशक्ति के आधार पर उसके सारे संभावित पक्षों परस्पर संबंधों प्रभावों और परिणामों पर विचार किया जाता हैं | इस पुस्तक की भाषा सरल है |
डॉ. जे.पी. शर्मा , एम.ए. (राजनीति शास्त्र) पी.एचडी., वर्तमान में सहायक प्रोफेसर के पद पर पिछले 15 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे हैं | इसके अतिरिक्त इन्होंने कई वर्ष अथिति अध्यापक के रूप में विभिन्न विद्यालयों में कार्य किया है | इन्होंने अनेक समिनार एवं सम्मेलन में भाग लिया है | अब तक करीब 30 लेख विभिन्न स्थानीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं |