जन-स्वास्थ्य और डॉ. जुगल किशोर (Jan-Swasthaya aur Dr. Jugal Kishore)

रूप चंद गौतम

Rs.1395.00

9788169592505
Hardcover
Academic Publication
2026

Description

चिकित्सा के क्षेत्र में प्रो. (डॉ.) जुगल किशोर का बड़ा नाम है। ये केवल अपने पेशे तक सीमित नहीं रहे बल्कि अपना कीमती समय निकाल कर ये दैनिक समाचार पत्रों में आलेख लिखते रहे। पाठकों के प्रश्नों का उत्तर देते रहे। कैमरे के सामने बोलते हुए दिखाई देते हैं। अब तक इनकी कई दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ये सभी पुस्तकें मेडिकल के क्षेत्र में पठन-पाठन से जुड़ी हैं। मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण मैं इन्हें अच्छी तरह से जानता हूँ। डॉ. जुगल किशोर की उपरोक्त सभी गतिविधियों की जानकारी बहुत कम लोगों को पता है। डॉ. रूपचंद गौतम एक अनुभवी लेखक हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में एक विशेष नाम है। इन्होंने डॉ. जुगल किशोर को एक जन-स्वास्थ्यकर्मी, स्तंभकार, लेखक, संपादक, एवं प्रोफेसर की छवि को सहज भाषा में इस पुस्तक के जरिए प्रस्तुत किया है। पुस्तक को पढ़ने से पता चलता है कि यह पठनीय के साथ-साथ संग्रहणीय भी है। यह पुस्तक केवल डॉक्टरों को ही नहीं बल्कि आम जनता को भी जन-स्वास्थ्य की जानकारी देने में पर्याप्त है। जो युवा मेडिकल के क्षेत्र में हैं या जाने की कोशिश में हैं उनके लिए डॉ. जुगल किशोर का जीवन प्रेरणा स्रोत भी रहेगा। प्रो. (डॉ.) सोदान सिंह MBBS, MD, PhD. (JAPAN) D.Sc. पूर्व कुलपति : हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड मेडिकल एजुकेशन विश्वविद्यालय, देहरादून एवं उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून । पूर्व महानिदेशक : चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, निदेशालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, सरकार । जीवन के सभी क्षेत्रों में पत्रकारिता सुधार और विकास की संभावनाओं को जन्म देती है। स्वास्थ्य भी इससे अछूता नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बहुमुखी प्रतिभा संपन्न डॉ. जुगल किशोर, कवि, लेखक, पत्रकार, संपादक, चिकित्सक, समाज सुधारक और प्रोफेसर होने के साथ-साथ तर्काधारित जीवन दर्शन के अनुयायी हैं। उनका आत्मीय और सहयोगी व्यवहार सभी को प्रभावित करता है। प्रारंभ से ही डॉ. जुगल किशोर ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने का संकल्प मन में धारण किया हुआ था। उन्होंने अपनी निष्ठा और मेहनत के बलबूते अपने संकल्प को साकार किया और इसे अपनी आजीविका से जोड़ते हुए भी जन सामान्य के स्वास्थ्य को स्वैच्छिक रूप से सुधारने के लिए अपने प्रयास निरंतर जारी रखे हैं। सुपरिचित पत्रकार और विद्वान लेखक डॉ. रूपचंद गौतम ने इस पुस्तक में प्रेरणादायी डॉ. जुगल किशोर के बहुआयामी व्यक्तित्व को समग्रता में उजागर करने का सफल प्रयास किया है। डॉ. भगवती प्रसाद निदारिया पूर्व उपनिदेशक (भाषा) केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार

About Author

डॉ. रूपचंद गौतम गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से जनसंचार में स्नातकोत्तर की उपाधि अर्जित करने के बाद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पी.एच.डी. की उपाधि अर्जित की। भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली से पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप पूरी की। दिल्ली विश्वविद्याल के डॉ. अम्बेडकर कॉलेज एवं मिरांडा हाउस के अलावा इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, मध्य प्रदेश में प्रोफेसर के रूप में अध्यापन। पिछले 40 वर्षो से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लेखन। सर्वोदय आशुलिपि, हिन्दी टंकण सिद्धान्त, विशिष्ट पत्रलेखन, मानक डिक्टेशन अभ्यास, टंकण से कंप्यूटर, प्रिन्ट मीडिया, इलेक्टॉनिक मीडिया के सिद्धान्त, संचार से जनसंचार, मीडिया लेखन, करियर पत्रकारिता, दलित रिपोर्टिंग, दलित पत्रकारिता के सामाजिक सरोकार, दिल्ली की दलित पत्रकारिता, दलित पत्रकारिता मूल्यांकन और मुद्दे, दलित पत्रकारिता का उद्भव और विकास, स्वास्थ्य पत्रकारिता, आदिवासी पत्रकारिता, आदिवासी जनसंचार, अम्बेडकर जनसंचार (14 भाग), जन-स्वास्थ्य और डॉ. जुगल किशोर, दलित राजनीति उद्भव और विकास, आजाद भारत में दलित, दलित मानवाधिकार, मोहनदास नैमिशराय आमने-सामने, मोहनदास नैमिशराय का साहित्य : मूल्यांकन, संवाद पर संवाद, दलित अभिव्यक्ति संवाद और प्रतिवाद आदि पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।

Table of Content

अध्याय 1 डॉ. जुगल किशोर का जीवन परिचय अध्याय 2 जन-स्वास्थ्य और डॉ. जुगल किशोर अध्याय 3 स्वास्थ्य पर डॉ. जुगल किशोर की वैचारिकता अध्याय 4 अखबारों में पाठकों के प्रश्नोत्तर अध्याय 5 डॉ. जुगल किशोर के साहित्य का मूल्यांकन अध्याय 6 संपादक के रूप में दक्षता अध्याय 7 डिजिटल मीडिया पर डॉ. जुगल किशोर अध्याय 8 साक्षीका बयान यूट्यूब पर चर्चा अध्याय 9 चिंतक क्या सोचते है