दलित आत्मकथाओं में सांस्कृतिक चेतना (Dalit Atmakathao me Sanskritik Chetna)

राजेंद्र बड़गुजर

Rs.1895.00

9788169592451
Hardcover
Academic Publication
2026

Description

NA

About Author

डॉ. राजेन्द्र बड़गूजर एक कहानीकार, कवि, आलोचक और लोक साहित्य के अध्येता हैं। इन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) से ‘देवेंद्र सत्यार्थी के हिंदी साहित्य में लोक-संस्कृति’ विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि और डॉ. वी. आर. अंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय, आगरा (उत्तर प्रदेश) से ‘हिंदी दलित आत्मकथाएँः एक सांस्कृतिक विश्लेषण’ विषय पर डी.लिट्. की उपाधि प्राप्त की है। इन्होंने आर.के.एस.डी. (पी.जी.) कॉलेज, कैथल (हरियाणा) में 21 वर्षों तक अध्यापक के रूप में कार्य किया है। उसके बाद उन्होंने महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार में हिंदी विभागाध्यक्ष और मानविकी एवं भाषा संकायाध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। इनके तीन कविता-संग्रह, दो कहानी-संग्रह, नौ आलोचना पुस्तकें और छत्तीस संपादित पुस्तकें प्रकाशित हैं। इन्हें कविता और कहानी लेखन के क्षेत्र में साहित्य सभा, कैथल (हरियाणा) द्वारा श्री अर्जुन दास मलिक स्मृति साहित्य सम्मान 2011 से सम्मानित किया गया है और कवि दयाचंद मायना चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) रोहतक, हरियाणा द्वारा महाशय दयाचंद मायना स्मृति लोक-साहित्य गौरव सम्मान 2019-20 से सम्मानित किया गया है। उन्हें हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला, हरियाणा द्वारा दो लाख रुपये के जनकवि मेहरसिंह सम्मान 2019 से भी सम्मानित किया गया है। एक समर्पित शिक्षक और प्रेरक मार्गदर्शक, प्रो. राजेन्द्र बड़गूजर के पास लगभग अठाईस वर्षों का शिक्षण और शोध अनुभव है। ये लोक साहित्य, भारतीय साहित्य, तुलनात्मक साहित्य के क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं। डॉ. राजेन्द्र बड़गूजर यूजीसी द्वारा ‘हिंदी दलित आत्मकथाओं में बचपन’ (2010) शीर्षक से लघु शोध परियोजना और आईसीएसएसआर, दिल्ली द्वारा ‘हरियाणा में अनुसूचित जातियों की शैक्षिक स्थितिः उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ’ (2012-14) शीर्षक से एक प्रमुख शोध परियोजना संपन्न कर चुके हैं। डॉ.राजेन्द्र बड़गूजर दो वर्ष तक भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला, हिमाचल प्रदेश में अध्येता के तौर पर भी रहे हैं। संप्रति: प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग अधिष्ठाता, मानविकी एवं भाषा संकाय महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार- 845401

Table of Content

प्राक्कथन अध्याय 1 दलित साहित्य: अर्थ, स्वरूप एवं परिभाषा अध्याय 2 हिन्दी दलित आत्मकथाओं में सामाजिक आयाम अध्याय 3 हिन्दी दलित आत्मकथाओं में राजनैतिक आयाम अध्याय 4 हिन्दी दलित आत्मकथाओं के आर्थिक आयाम अध्याय 5 हिन्दी की आत्मकथाएँ: साहित्यिक संस्कृति अध्याय 6 हिन्दी दलित आत्मकथाओं में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम अध्याय 7 हिन्दी दलित आत्मकथाएँ: सांस्कृतिक प्रदेय उपसंहार संदर्भ ग्रंथ सूची