मध्यकालीन भारत का इतिहास (Madhyakaleen Bharat ka Itihas)

दीप्ति पांडेय

Rs.2195.00

9788169592239
Hardcover
Academic Publication
2026

Description

मध्यकालीन भारत "प्राचीन काल" और "आधुनिक काल" के बीच भारतीय उपमहादीप केउत्तर-शास्त्रीय इतिहास की एक लंबी अवधि को संदर्भित करता है। अमतौर पर इसे छटी शताब्दी ईस्वीमें गुप्त साम्राज्य के विघटन से लेकर 1526 में मुगल साम्राज्य की शुरुआत के साथ प्रारंभिक आयुनिककाल की शुरुआत तक माना जाता है, हालांकि कुछ इतिहासकार इसे इनसे बाद में शुरू और समाप्तहोने वाला मानते हैं। अंक मध्यकाल को स्वयं प्रारंभिक मध्यकालीन और उत्तर मध्यकालीन युगों मेंविभाजित किया गया है। प्रारंभिक मध्ययुर्गीन काल में, भारतीय उपमहादीप पर 40 से अधिक विभिन्नराज्य थे, जो विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, लेखन प्रणालियों और धर्मों की मेजवानी करते वे। समयअवधि की शुरूुआत में, बौद्ध धर्म पूरे क्षेत्र में प्रमुख वा, इंडो गंगा के मैदान पर अल्पकालिक पाल साम्राज्यने बौद्ध धर्म की संस्थाओं को प्रायोजित किया वा। ऐसा ही एक संस्थान भारत के आपुनिक विहार मेंबौद्ध नालंदा महाविहार था, जो विद्वता का केंद्र था और विभाजित दक्षिण एशिया को बैश्विक बौद्धिक मंचपर लाया। एक अन्य उपलब्धि चत्रंग खेल का आविष्कार वा जिसे बाद में यूरोप में निर्यात किया गयाऔर शतरंज बन गया। दरक्षिणी भारत में, चोल के तमिल हिंदूर साम्राज्य ने एक विदेशी साम्राम्य के साथप्रमुखता प्राप्त की, जिसने आधुनिक श्रीलंका, मलेशिया और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों को कषे्रों कीदेखरेख के रूप में नियंत्रित किया, और हिंदू बर्म और बौद्ध यर्म को दक्षिणपूर्व के ऐतिहासिक सांस्कृतिकक्षेत्र में फैलाने में मदद की। इस समया्वयि में, अफगानिस्तान, तिब्वत और दक्षिण पूर्व एशिया जैसेपड़ोसी क्षेत्र दक्षिण एशियाई प्रभाव में थे।

About Author

दीप्ति पाण्डेय एक शिक्षिका, लेखिका एवं सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हे शिक्षण के केत्र में 20वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उनकी विशेष रुवि सामाजिक, सांस्कृतिक एवंऐतिहासिक अध्ययन में है, विशेष रूप से भारतीय इतिहास और विरासत के अप्ययन में।उनके शैक्षणिक एवं साहित्यक कार्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिकमूल्यों एवं ऐतिहासिक चरोहर के गहन अध्ययन और संर्वन के प्रति उनकी प्रतिवदता को दर्शाति हैं। अपने शिक्षण, शोय एवं लेखन के माध्यम से वे निरंतर ऐतलिहासिक जागर्कताऔर सामाजिक समझ को वढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों और विद्यार्थियों में भारत कीसांस्कृतिक एवं बोदिक विरासत के प्रति गहरी समझ और सम्मान विकसित करना है।

Table of Content

भूमिका अध्याय 1 मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत अध्याय 2 पूर्व मध्यकालीन भारत (800-1200 ई.) अध्याय 3 दिल्ली सल्तनत अध्याय 4 विजयनगर साम्राज्य अध्याय 5 मुगुल अक्रमण और अन्य साम्राज्यों का उदय अध्याय 6 मुग्ल साम्राज्य अध्याय 7 मराठा साम्राज्य अध्याय अध्याय 8 मध्यकालीन समाज धार्मिक आन्दोलन संदर्भ सूची