यह संकलन सन् 1924 से लेकर सन् 1950 तक के स्त्रियों के वैचारिक लेखन पर केन्द्रित है। इसमें विश्वमित्र, चाँद, माधुरी, विशालभारत, सरस्वती, नया समाज, आजकल से इस दौर में विचार साहित्य लिख रही स्त्रियों के लेखों को शामिल किया गया है। इसमें जीवनीपरक लेख, यात्रा वृतान्त, विदेशों में स्त्रियों की स्थिति, स्त्री समाज की दशा, स्त्री-शिक्षा, स्त्री-समस्या, स्त्रियों की पराधीन स्थिति की जटिलता, उनकी आकांक्षा, साहित्यालोचन, मूल्यांकन तथा विविध खंड मिलाकर कुल 41 लेख शामिल हैं। स्त्रियों के इन विविध विषयों पर लिखे गए वैचारिक आलेखों से कई मिथ टूटते हैं। पहला तो यही कि हिंदी भाषी क्षेत्र की स्त्रियाँ विचार साहित्य और निबंध साहित्य नहीं लिखतीं, वे सिर्फ कविता, कहानी आदि लिखती हैं हिंदी साहित्येतिहास की प्रमुख पुस्तकें इस मिथ का निर्माण करती हैं। दूसरा बड़ा मिथ कि स्त्रियाँ राजनीतिक विषयों पर नहीं लिखतीं और तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण मिय है कि राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान प्रमुख राजनीतिक विचारधारा और स्त्री बुद्धिजीवियों की धारणा विभिन्न मसलों पर एक थी। इन सशक्त वैचारिक लेखों को पढ़कर हम स्त्री-मुक्ति, राष्ट्रीय स्वाधीनता, विश्व-बंधुत्व एक वैकल्पिक की चेतना की स्पष्ट झलक पा सकते हैं।
सुधा सिंह : जन्म कोलकाता, प. बंगाल। कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम. हिंदी (स्वर्ण पदक), सुप्रसिद्ध आलोचक रामविलास शर्मा के आलोचना कर्म पर पीएच.डी। श्री शिक्षायतन महाविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय से व्याख्याता (हिंदी) की नौकरी का आरंभ। तत्पश्चात् विश्वभारती विश्वविद्यालय, प. बंगालमें हिन्दी व्याख्याता के पद पर लगभग पांच वर्षो तक अध्यापन। सन् 2004 में हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में रीडर (मीडिया, जर्नलिज्म और अनुवाद) पद पर नियुक्ति। सन् 2010 से हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और सन् 2020 से हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में ही सीनियर प्रोफेसर पद पर कार्यरत । सन् 2010-12 तक आईसीसीआर चेयर पर अश्गाबात, तुर्कमेनिस्तान में हिंदी भाषा और साहित्य की संस्थापक विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य। आलोचना, मीडिया, पत्रकारिता और अनुवाद के क्षेत्र में अनेक पुस्तकें प्रकाशित। बांग्ला से हिंदी में राससुंदरी दासी की आत्मकथा का 'मेरा जीवन' नाम से अनुवाद। अंग्रेजी से हिंदी में 'जनमाध्यम', 'जनतंत्र जनमाध्यम और वर्तमान संकट', 'सूचना समाज' पुस्तकों का संपादन और अनुवाद। महत्वपूर्ण आलोचना पुस्तकों में 'आधुनिक काल और रामविलास शर्मा', 'ज्ञान का स्त्रवादी पाठ', 'जनमाध्यम सैद्धांतिकी', 'स्त्री संदर्भ में महादेवी', 'स्त्री कथा', अस्मिताः साहित्य और विचारधारा', 'मध्यकालीन साहित्य विमर्श' (सं), 'मीडिया प्राच्यवाद और वर्चुअल यथार्थ', 'स्वाधीनता संग्राम हिंदी प्रेस और स्त्री का वैकल्पिक क्षेत्र', 'वैकल्पिक मीडिया लोकतंत्र और नॉम चोमस्की' आदि।
भूमिका जीवनीपरक अध्याय 1. देवी सरोजिनी (संक्षिप्त जीवन चरित) (श्री मेघवाहन) अध्याय 2. स्वर्गीया जगरानी देवी (संक्षिप्त परिचय) (संपादक 'चाँद') अध्याय 3. बा और बापू (माया गुप्त) यात्रा अध्याय 4. मेरी विलायत यात्रा (श्रीमती महारानी शिवकुमारी देवी) विदेश अध्याय 5. ब्रिटिश ईस्ट अफ्रिका में स्त्री शिक्षा (श्रीमती सरस्वती देवी सहगल) 93 अध्याय 6. प्रदेशों में उन्नति किस प्रकार हो? (मिसेज सत्वन्त कौर) अध्याय 7. उपनिवेशों में भारतीय स्त्री समाज (श्रीमती जयकुमारी देवी) अध्याय 8. मॉरीशस प्रवासी भारतीय (श्रीमती भगवन्ती देवी) स्त्री-समाज अध्याय 9. भावी युग में व्यक्ति और समाज का संबंध (कुमारी लाज वरमानी) 103 अध्याय 10. नारी और समाज (श्री कृष्णकुमारी सरीन) अध्याय 11. मानसिक स्वास्थ्य की समस्या (श्रीमती मनसा पंडित) अध्याय 12. चिर उपेक्षिता नारी (श्रीमती शांतिदेवी आरोड़ा) अध्याय 13. स्त्री-समाज की अवनति (शकुंतला देवी गुप्ता) अध्याय 14. सृजन करो नूतन मन! (डॉ. (कुमारी) सुप्तिमयी सिन्हा) अध्याय 15. स्त्री-सुधार (चंद्रावली कुअँरि) अध्याय 16. कुमाऊँ का महिला-समाज (कुमारी कलावती पाल) अध्याय 17. स्वान्तः सुखाय (महादेवी वर्मा) अध्याय 18. स्त्रियों के अधिकार (श्रीमती स्नेहलता बोरदिया) स्त्री-शिक्षा अध्याय 19. विद्यार्थी और समाज-सुधार (डॉ. सुप्तिमयी सिनहा) अध्याय 20. सह-शिक्षा की समस्या (श्रीमती विद्वत्तमा मिश्र) अध्याय 21. नवीन शिक्षा और प्राचीन आदर्श (मनोरमा गुप्त) अध्याय 22. भारत में स्त्री-शिक्षा को प्रगति (मनोरमा गुप्त) स्त्री-समस्याः पराधीनता और आकांक्षा अध्याय 23. नारी- समस्या (श्रीमती लालमणि देवी) अध्याय 24. महिला आंदोलन और नई समस्याएँ (यशवंती देवी द्विवेदी) अध्याय 25. भारतीय नारी की आर्थिक परतंत्रता (श्रीमती सुमित्राकुमारी सिन्हा) अध्याय 26. भारतीय नारी की पराधीनता और उसका तात्कालिक हल (श्रीमती सुमित्रा कुमारी सिनहा) अध्याय 27. नारी आन्दोलन सफल कैसे हो? (सावित्रीदेवी अरोड़ा) अध्याय 28. नारी की वर्तमान स्थिति (विद्या देवी) अध्याय 29. भाग्य, भविष्य और कर्म (श्रीमती आशा देवी) अध्याय 30. भारतीय महिलाओं के सामने कार्य (मनोरमा गुप्त) अध्याय 31. भारतीय नारी की आकांक्षा (हीरादेवी चतुर्वेदी) अध्याय 32. नारी जाति का आदर्श (मनोरमा गुप्त) अध्याय 33. महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध कैसे रुकें? (मनोरमा गुप्त) 223 अध्याय 34. महिलाओं का उत्थान कैसे हो? (यशवंती देवी द्विवेदी) साहित्यालोचन अध्याय 35. संत कबीर पर आलोचनात्मक दृष्टि (सौ. सावित्री निगम) अध्याय 36. ताराशंकर के उपन्यास और कहानियाँ (माया गुप्त) अध्याय 37. दो महाकवि (शचीरानी गुर्टू) मूल्यांकन अध्याय 38. गाँधीजी और भारतीय नारी (कमलादेवी चट्टोपाध्याय) विविध अध्याय 39. भारत के प्राचीन अंगराग (श्रीमती कमला सद्गोपाल) अध्याय 40. पोहरी (ग्वालियर) के ग्रामसेवक-शिक्षण-शिविर में श्रीमती कमला देव चट्टोपाध्याय का भाषण (श्रीयुत रामप्रसाद सिंह) अध्याय 41. ये शरणार्थी (श्री इंदुमती कौशल)